अजीब इतेफाक था उसको भी किसी से ‘इश्क़’ हुआ था।जो मुझे हर दिन खामोशी से गुम कर देता है।मेरे ठोकरें खाने से भी कुछ लोगों को जलन है,️ मौत क�
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मत पूछो दोस्तों ये इश्क़ कैसा होता है,जो रुलाता है नाउसके ही गले लग के रोने को जी चाहता है…यह ज़िन्दगी बस सिर्फ पल दो पल है#,जिसमें न तो आज# �